बौध्द दर्शन में पुनर्जन्म किसका, क्यों और कैसे

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बौध्द दर्शन के अनुसार यह शरीर नाम (Mind) तथा रूप (Matter) का संयोग है| शरीर के मानसिक धर्मों को नाम और स्थूल शरीर जो कि चार महाभूतों (पृथ्वी,वायु,जल और अग्नि)से बना है, उसे रूप कहते हैं|नाम और रूप सदैव साथ-२ रहते हैं, उन्हें प्रथक नहीं किया जा सकता है| पुनर्जन्म किसका, क्यों और कैसे होता है यह बात भन्ते नागसेन ने मिलिन्द प्रश्न नामक ग्रन्थ में राजा मिलिन्द को बहुत अच्छी तरह स्पष्ट की है|प्रस्तुत है भन्ते नागसेन से राजा मिलिन्द का वार्तालाप-


राजा मिलिन्द----"भन्ते जी! कौन पुनर्जन्म ग्रहण करता है|"
भन्ते नागसेन-----"राजन! नाम और रूप जन्म ग्रहण करता है|"
राजा मिलिन्द -----"भन्ते जी! क्या यही नाम और रूप जन्म ग्रहण करता है? "
भन्ते नागसेन -----"नहीं राजन! यही नाम और रूप जन्म ग्रहण नहीं करता है, मनुष्य इस नाम और रूप से पाप या पुण्य करता है उसी कर्म के करने से दूसरा नाम और रूप जन्म ग्रहण करता है|"
राजा मिलिन्द----"भन्ते जी! तब तो पहला नाम और रूप अपने कर्मों से मुक्त हो गया "
भन्ते नागसेन -----"राजन! यदि जन्म ग्रहण न करे तो मुक्त हो गया, चूंकि वह जन्म ग्रहण करता है इसलिये मुक्त नहीं हुआ|"
राजा मिलिन्द -----"भन्ते जी! उपमा देकर समझाइये "
(भन्ते नागसेन ने राजा मिलिन्द को ५ उपमाओं द्वारा समझाइया है, जिनमें से १उपमा बाबा साहब ने अपनी पुस्तक भगवान बुध्द और उनका धर्म में लिखी है)
भन्ते नागसेन -----"राजन! यदि कोई आदमी किसी का आम चुराये और आम का मालिक पकड़ कर उसे राजा के पास ले जाये तथा कहे कि महाराज! इसे दण्ड दें इसने मेरा आम चुराया है |
इस पर वह व्यक्ति कहे कि महाराज मालिक ने जो आम (बीज) बोये थे, वे तो मैने चुराये नहीं चुराये गये आम तो दूसरे हैं,इसलिये मुझे दण्ड नहीं मिलना चाहिये|राजन आप ही बतायें कि उसे दण्ड मिलना चाहिये या नहीं"
राजा मिलिन्द----"हां भन्ते जी! उसे दण्ड मिलना चाहिये |"
भन्ते नागसेन------"सो क्यों राजन! "
राजा मिलिन्द ------"भन्ते जी! वह भले ही ऐसा कहे,किन्तु पहले आम छोड़ दूसरे आम को चुराये जाने के लिये उसे दण्ड अवश्य मिलना चाहिये "
भन्ते नागसेन----"राजन! इसी प्रकार मनुष्य इस नाम और रूप से पाप या पुण्य करता है, उन कर्मों से दूसरा नाम और रूप जन्म ग्रहण करता है| इसलिये पहला नाम और रूप अपने कर्मों से मुक्त नहीं हुआ | "
राजा मिलिन्द -----"बहुत अच्छा भन्ते जी बहुत अच्छा|अब यह बतायें कि एक नाम और रूप से जो कर्म किये जाते है, उनका क्या होता है "
भन्ते नागसेन-----"राजन! वे कर्म छाया की तरह पीछा करते रहते हैं "


द्वारा - प्रो० शैतान सिंह शाक्य

(रसायन विज्ञान में M.Sc, Ph.D, 1974 से स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (उ० प्र०) द्वारा चयनित स्नातकोत्तर महाविद्यालय का प्राचार्य एवं कानपुर विश्वविद्यालय की सर्वोच्च समिति 'अधिशासी परिषद' के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए सेवानिवृत्त)