भगवान बुद्ध के दर्शन और आधुनिक विज्ञान की तुलना

आज से २५०० साल पूर्व भगवान बुद्ध द्वारा जो दर्शन प्रस्तुत किया गया था, उनका आधुनिक विज्ञान के मूलभूत सिद्धांत भी समर्थन करते हैं | कुछ उदाहरण आपको प्रस्तुत कर रहा हूं |

 

(१) पदार्थ तथा ऊर्जा की अविनाशिता का नियम का नियम

आधुनिक विज्ञान का यह नियम है कि "ऊर्जा (Energy) तथा पदार्थ (Matter) को न तो नष्ट किया जा सकता है और न उत्पन्न किया जा सकता है| इन्हें केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है|" विज्ञान का यह नियम भगवान बुद्ध के दर्शन से बहुत मेल खाता है| भगवान बुद्ध ने कहा कि वस्तुएं एक रूप से दूसरे स्वरूप में निरंतर परवर्तित होती रहती हैं |वे कभी नष्ट नहीं होती यदि एक वस्तु कहीं लोप होती हुई दिखाई पड़ती है | तो दूसरे स्थान पर उसका दूसरे स्वरूप में उत्पन्न होना निश्चित है | भगवान बुद्ध कहते हैं कि इस शरीर में नाम (सूक्ष्म मानसिक धर्म या विज्ञान या चेतना) इसे उर्जा(Energy) भी कहा जा सकता है,और रूप( स्थूल शरीर जो कि चार महाभूतों से मिलकर बना है), जिसे पदार्थ(Matter) भी कह सकते हैं कभी नष्ट नहीं होते यह नाम और रूप एक जगह लुप्त होकर दूसरे स्थान पर दूसरे नाम रूप के स्वरूप में उत्पन्न होते है|इस प्रकार तथागत भगवान बुद्ध का नाम - रूप की पुनरुत्पत्ति (पुनर्जन्म) आधुनिक विज्ञान के पदार्थ और उर्जा की अविनाशिता के नियम केअनुसार सत्य है |

(२)पदार्थ की गतिशीलता का नियम

 विज्ञान के इस नियम के अनुसार "ब्रह्मांड का प्रत्येक कण गतिशील अवस्था में रहता है कोई भी कण स्थिर अवस्था में नहीं है|" भगवान बुद्ध के दर्शन के अनुसार भी प्रत्येक वस्तु गतिशील(परिवर्तनशील) अवस्था में है| प्रत्येक वस्तु अपनी जीवन- यात्रा के दौरान स्वरूपों को बदलते हुए गतिशील रहती है| बस्तुयें कभी स्थिर (अपरिवर्तनशील)अवस्था में नहीं रहती| परिवर्तनशीलता(गतिशीलता) ही वस्तुओं का गुणधर्म है|ऐसी देशना तथागत ने भी दी थी|

 

(३) ऊर्जा प्रवाह का क्वांटम सिद्धांत

 विज्ञान के इस सिद्धांत के अनुसार "ऊर्जा का प्रवाह सदैव बिच्छिन्न (Discontineous) रूप में होता है यह कभी सतत (Contineous) रूप में नहीं होता|"भगवान बुद्ध के दर्शन में भी वस्तुओं का एक रुप से दूसरे रुप में परिवर्तन विच्छन्न-प्रवाह है |अर्थात एक वस्तु के पूर्ण रूप से लुप्त होने के बाद ही दूसरा स्वरूप उत्पन्न होता है|बिलकुल विज्ञान के क्वान्टम सिद्धांत के अनुसार जैसा ही |

 

(४) पदार्थों का वर्गीकरण

भौतिक तथा रसायन विज्ञान के अनुसार सभी द्रव्यों को दो भागों में बांटा गया है, ऊर्जा तथा पदार्थ| बुद्ध के दर्शन में भी इन दोनों को नाम और रूप की संज्ञा दी गई है|नाम को ऊर्जा और रूप को पदार्थ कहा जा सकता है|

 

(५) प्रत्येक घटना का कारण है

प्रकृति में जितनी घटनाएं घटित हो रही हैं उन सबका कोई न कोई कारण है|इन कारणों को खोजना ही विज्ञान का उद्देश्य है| भगवान बुद्ध ने भी अपने दर्शन में प्रतीत्यसमुत्पाद के आधार पर कारण-कार्य सिद्धांत की स्थापना की थी | इसके अनुसार प्रकृति में हर घटना का कोई न कोई कारण है|भगवान बुद्ध का प्रतीत्यसमुत्पाद आज के विज्ञान का मूल आधार है|ऐसे ही और भी उदाहरण दिये जा सकते हैं| इसलिए ही भगवान बुद्ध के धर्म को वैज्ञानिक धर्म कहा जाता है| क्योंकि यही धर्म वैज्ञानिक बुद्धि को संतुष्ट कर सकता है|



द्वारा - प्रो० शैतान सिंह शाक्य

(रसायन विज्ञान में M.Sc, Ph.D, 1974 से स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (उ० प्र०) द्वारा चयनित स्नातकोत्तर महाविद्यालय का प्राचार्य एवं कानपुर विश्वविद्यालय की सर्वोच्च समिति 'अधिशासी परिषद' के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए सेवानिवृत्त)