भगवान बुध्द के ५ शीलों के पालन के बिना दुनियां कायम नहीं रह सकती|

भगवान बुध्द के ५ शील हैं|

(१) हिंसा न करना
(२) चोरी न करना
(३) व्यभिचार न करना
(४) झूंठ न बोलना
(५) नशा-पान न करना


दुनियां को सुख, शान्ति एवं कानून व्यवस्था के अनुसार कायम बनाये रखने के लिये उक्त ५ शील हर व्यक्ति पर लागू होते हैं चाहे वह व्यक्ति किसी देश, धर्म और जाति का क्यों न हो|यह शील इतने महत्व पूर्ण हैंकि दुनियां में हर देश की सरकार कानून बनाकर अपने नागरिकों से इनका पालन कराती है|क्यों कि इन शीलों के वगैर दुनियां कायम नही रह सकती है|कुछ देशों का उदाहरण देकर ५ शीलों के महत्व को स्पष्ट करूंगा|


(क) अमेरिका :- यहॉ अंग्रेजों की सरकार है जिनके धर्म का मुख्य काम चर्च में जाकर प्रार्थना करना है|लेकिन वहॉ का कोई नागरिक यदि चर्च में जाकर प्रार्थना नही करता है तो वहां की सरकार पर कोई कानून नही है जो उसे दण्डित कर सके|परन्तु यदि वहां का कोई नागरिक भगवान बुध्द के ५ शीलों में से किसी एक का भी उल्लंघन करता है जैसे हिंसा,चोरी,बलात्कार/व्यभिचार करता है तो उसे वहां के कानून के अनुसार सजा का प्रावधान है|


(ख) सऊदी अरब :- यहॉ मुसलमानो की सरकार है मुसलमानों के धार्मिक काम हैं रोजा, नमाज, जकात|परन्तु वहां का कोई नागरिक यदि इन तीनों कामों को न करे तो वहां की सरकार पर कोई कानून नही है जो उसे जेल भेज दे|परन्तु यदि वह भगवान बुध्द के ५ शील हिंसा,चोरी, व्यभिचार-- न करने के किसी एक भी शील का उल्लंघन करे तो उसे वहां के कानून के अनुसार कठोर दण्ड दिया जाता है|


(ग) भारत :- यहॉ हिन्दुओं की सरकार है जिनके धर्म का मुख्य काम गंगा स्नान,हवन करना, मन्दिर जाना है| परन्तु यहां का नागरिक यदि इन कामों में से कोई काम नहीं करता है तो यहां की सरकार पर कोई कानून नही है जो उसे जेल भेज दे|लेकिन यदि वह भगवान बुध्द के ५ शीलों में से किसी एक का भी उल्लंघन करे तो यहॉ उसे कानून के अनुसार दण्डित करने का प्रावधान है|


(घ) रुस :- यहॉ कम्युनिष्टों की सरकार है जो किसी धर्म को नही मानते|वहां का नागरिक भी यदि भगवान बुध्द के ५ शीलों में से किसी एक का भी उल्लंघन करता है तो उसे वहां की सरकार अपने कानून के अनुसार दण्डित करती है| मेरे कहने का मतलब यह है कि दुनियां में सरकारें भगवान बुध्द के ५ शीलों का पालन कराने के लिये ही बनती और बिगड़ती हैं| सरकार कहीं की भी क्यों न हो वह वहां के धर्म का पालन न कराकर भगवान बुध्द के धर्म के ५ शीलों का पालन करातीं हैं| भगवान बुध्द के ५ शीलों के पालन के बिना यह दुनियां कायम नही रह सकती है|



द्वारा - प्रो० शैतान सिंह शाक्य

(रसायन विज्ञान में M.Sc, Ph.D, 1974 से स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (उ० प्र०) द्वारा चयनित स्नातकोत्तर महाविद्यालय का प्राचार्य एवं कानपुर विश्वविद्यालय की सर्वोच्च समिति 'अधिशासी परिषद' के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए सेवानिवृत्त)